हमारा परिचय

विश्व कविता दिवस

कोलकाता 21 मार्च। “कविता संवेदना का विस्तार करती है, भाषा का संस्कार करती है और सौंदर्य चेतना का परिष्कार करती है। वह मूल्यों का हस्तांतरण करती है।ये विचार है प्रख्यात कवि एवं साहित्यकार डॉ. इन्दुशेखर तत्पुरुष (जयपुर) के, जो आज श्री बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय कक्ष में “विश्व कविता दिवसके अवसर पर एक आत्मीय संगोष्ठी में बोल रहे थे। डॉ तत्पुरुष को विचार मंच द्वारा आज कन्हैयालाल सेठिया सम्मान द्वारा समादृत किया गया।

डॉ. तत्पुरुष ने कहा कि शब्द के शिल्प से आती है कविता। जीवन के यथार्थ को अनुभूति में बदलता है कवि। कवि बदलावों का वाहक होता है। वह दृष्टि भी देता है और दर्शन भी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता की पुस्तकालय के अध्यक्ष डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी ने। उन्होंने कहा कि कविता हमें सत्यं शिवं सुन्दरं की दृष्टि प्रदान करती है। बड़ी कविताएँ हमारे समाज को दिशा देती हैं।

धन्यवाद ज्ञापन करते हुए डॉ. ऋषिकेश राय ने समाज में कविता की अनिवार्यता  पर विचार प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में सर्वश्री महावीर बजाज, डॉ. तारा दूगड़, नन्दकुमार लढ़ा, अरुणप्रकाश मल्लावत, चन्द्रकुमार जैन, दुर्गा व्यास, योगेशराज उपाध्याय, आनन्द शर्मा, गायत्री बजाज, भागीरथ चांडक, रामचन्द्र अग्रवाल, भागीरथ सारस्वत, श्रीमोहन तिवारी एवं बंशीधर शर्मा प्रभृति उपस्थित थे।

आगामी कार्यक्रम

विवेकानन्द सेवा सम्मान 2021

डॉ. अरुण प्रकाश अवस्थी स्मृति आयोजन २०२०

श्री बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्‍तकालय: एक परिचय

1918 ई. में कोलकाता में स्‍थापित श्री बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्‍तकालय आज देश के साहित्यिक एवं सांस्‍कृतिक क्षेत्र का सुपरिचित नाम हैं। यह एक पुस्‍तकालय मात्र नहीं है बल्कि यह राष्‍ट्रीय विरासत को आगे बढ़ाने वाली शैक्षणिक एवं साहित्यिक संस्‍था है। एक अच्‍छे वाचनालय एवं सम्‍पन्‍न पुस्‍तकालय के अलावा इसके द्वारा विभिन्‍न अवसरों पर गोष्ठियों, व्‍याख्‍यानों, साहित्यिक-सांस्‍कृतिक कार्यक्रमों एवं विविध विषयों पर 30 से अधिक प्रकाशनों तथा अखिल भारतीय स्‍तर के तीन सम्‍मानों तथा विवेकानन्‍द सेवा सम्‍मान, डॉ. हेडगेवार प्रज्ञा सम्‍मान एवं राष्‍ट्रीय शिखर प्रतिभा सम्‍मान ने इसको विशिष्‍टता प्रदान की है। कुल मिलाकर यह एक जागरूक एवं संक्षम संस्‍थान के रूप में गतिशील है। मनोज कुमार